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बैंक से रुपए नहीं मिलने से परेशान किसानों किया चक्का जाम।

कोटा स्थित जिला सहकारी केंद्रीय बैंक का मामला।

करगी रोड कोटा। छत्तीसगढ़ सरकार किसानों से धान खरीदी करती है। एवम खरीदे गए धान के रुपए किसानों के खाते में डाले जाते है जिससे किसान कोआपरेटिव बैंक के माध्यम से रुपए निकालता है । परंतु जब बेचे गए धान का पैसा किसानों को ना मिले तो किसान अपने आप को ठगा सा महसूस करता है। पूरा मामला कोटा स्थित जिला सहकारी केंद्र का जहां किसान बेचे गए धान का रुपया ना मिलने ने परेशान होकर चक्का जाम कर दिया ।

आक्रोशित किसानों का कहना था की लगातार कई दिनो से हम बैंक का चक्कर काट रहे है परंतु समय पर हमको रुपया नहीं मिल रहा हैं। एक महिला किसान का यह आरोप लगाया की पिछले कई दिनो से मैं अपने छह माह के बच्चे को घर में छोड़कर बैंक आ रही हू पर अभी तक रुपया नहीं मिला । एक किसान ने बैंक में घूसखोरी का आरोप लगाते हुए बताया की मैने 25000 रुपए का की निकासी पर्ची भरा था परंतु मुझे 24000 रुपए ही दिए गए।

 

यह पहला मामला नहीं है जब कोटा सहकारी बैंक मे अनियमितता पाई गई हो इसके पहले भी पूर्व मैनेजर ऊपर घूसखोरी आरोप लगे थे जिसे कार्यवाही करते हुए कोटा बैंक से हटा दिया गया था।इस पूरे विषय  में जब कूपरेटिव बैंक मेनेजर से फोन में बात की गई तो उनका कहना था की फंड की व्यवस्था कर ली बिलासपुर हेड ऑफिस आया हूं।

चक्का जाम की सूचना मिलते ही कोटा तहसीलदार प्रांजल मिश्रा,कोटा एस डी ओ पी सिद्धार्थ बघेल ,एवम कोटा टी आई टी एस नवरंग मौके पर पहुंचे एवम अधिकारियों के आश्वासन के बाद किसानों ने चक्का जाम समाप्त किया ।

किसान धान बेचकर ही रुपया कमाता है । और इसी पैसे से वह घर में मांगलिक कार्य दशगात्र एवम अन्य खर्चों को इसी रकम से पूरा करता है ।परंतु जब समय पर उसको भुगतान ना मिले तो किसानों की व्यथा को समझा जा सकता है। बहरहाल देखना यह होगा आखिर अपने ही बेचे गए धान का रकम प्राप्त करने किसानों को बैंक का चक्कर काटना पड़ेगा । एवम कब तक इस समस्या से निजात मिल पाएगा।